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बवासीर और फिशर का होम्योपैथिक इलाज: डॉक्टर अजित जैन से जानिए 3 सबसे असरदार दवाएं (G8, G9, G71)

by Dr. Ajit Jain (Senior Homeopathy Consultant), 05 Jun 2026

बवासीर (Piles) और फिशर (Anal Fissure) से परेशान हैं? जानिए लक्षण और 3 अचूक होम्योपैथिक दवाएं

Written by: Team Gangagyan | Medical Reviewer: Dr. Ajit Jain (Senior Homeopathy Consultant)
 
Medical Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी होम्योपैथिक दवा का सेवन करने से पहले हमेशा एक योग्य और रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श ज़रूर लें।
 

 
खराब लाइफस्टाइल, लगातार बैठकर काम करने की आदत और पेट की पुरानी खराबी के कारण आज के समय में बवासीर (Piles) और फिशर (Anal Fissure) एक बेहद आम समस्या बन चुके हैं।
बहुत से लोग शर्मिंदगी या झिझक के कारण शुरुआती दौर में इस बारे में किसी से बात नहीं करते, जिससे यह बीमारी समय के साथ और भी गंभीर रूप ले लेती है। आइए, सीनियर होम्योपैथी कंसलटेंट डॉ. अजित जैन के बताए फॉर्मूले के अनुसार आसान शब्दों में समझते हैं कि पाईल्स और फिशर क्या हैं, और होम्योपैथी में इसका क्या सटीक व स्थाई इलाज संभव है।
 

पाईल्स और एनल फिशर क्या हैं? इनमें क्या अंतर है?

अक्सर लोग पाईल्स और फिशर को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों थोड़े अलग हैं:
  1. पाईल्स (Piles / बवासीर): इसमें गुदा मार्ग (Anal area) की नसें फूल जाती हैं और वहाँ छोटी-छोटी गाँठ या मस्से बन जाते हैं। इसमें मल त्याग करते समय खून (Bleeding) आने की संभावना ज्यादा होती है।
  2. एनल फिशर (Anal Fissure): जब कड़ा मल (Hard Stool) आने की वजह से गुदा मार्ग की नाजुक त्वचा कट या छिल जाती है, तो उसे फिशर कहते हैं। फिशर का मुख्य लक्षण है—लैट्रिन जाने के बाद घंटों तक असहनीय तेज जलन और चुभन वाला दर्द होना।

लक्षण के अनुसार 3 बेहतरीन होम्योपैथिक दवाएं (Ganga Homeo Pharma Drops)

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में लक्षणों के आधार पर बीमारी को जड़ से ठीक किया जाता है। डॉ. अजित जैन के अनुसार, यदि आप पाईल्स, फिशर के कट, तेज जलन और पुरानी कब्ज से पूरी तरह राहत पाना चाहते हैं, तो इन 3 दवाओं (Ganga Homeo Pharma Drops) का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है:
 
1. मस्सों और पुरानी बवासीर के लिए: G-8 (Piles Drops)
अगर आपको पुराना पाईल्स है, जहाँ गुदा मार्ग की नसें अत्यधिक फूल गई हैं और वहाँ गांठ या मस्से जैसी स्थिति बन गई है, तो यह दवा आपके लिए बेहद जरूरी है।
  • यह कैसे काम करती है: G8 (8 नंबर) ड्रॉप्स विशेष रूप से फूली हुई नसों को वापस अपनी सामान्य स्थिति में लाने और पाईल्स की समस्या को जड़ से सुखाने (मस्सों को बिठाने) के लिए डिज़ाइन की गई है।
2. तेज जलन, दर्द और कट के लिए: G-9 (Anal Fissure Drops)
मल त्याग करने के बाद यदि आपको बहुत देर तक तेज जलन बनी रहती है, कटने या छिलने जैसा अहसास होता है, तो डॉक्टर इस विशेष दवा को साथ में लेने की सलाह देते हैं।
  • यह कैसे काम करती है: G9 (9 नंबर) ड्रॉप्स मुख्य रूप से एनल फिशर (Anal Fissure) के घाव और दरारों को तेजी से भरती है। यह लैट्रिन जाने के बाद होने वाली असहनीय जलन और दर्द को तुरंत शांत करने का काम करती है।
3. पेट साफ करने और कब्ज के लिए: G-71 (Laxative Drops)
बवासीर और फिशर होने का सबसे प्राथमिक और बड़ा कारण है पेट का साफ न होना (Constipation)। जब तक आपकी कब्ज की समस्या दूर नहीं होगी, तब तक बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती।
  • यह कैसे काम करती है: G71 (71 नंबर) ड्रॉप्स एक बेहद सुरक्षित और प्रभावी नेचुरल लैक्सेटिव है। यह आपके मल को मुलायम बनाकर पेट को आसानी से साफ करती है, जिससे सुबह के समय आपको मल त्याग करते समय बिल्कुल भी जोर नहीं लगाना पड़ता। 

 

डॉक्टर की सलाह: इन तीनों दवाओं का एक साथ सेवन कैसे करें?

यदि आप पुराने पाईल्स, मस्सों, फिशर की असहनीय जलन और क्रोनिक कब्ज जैसी मिली-जुली समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो डॉ. अजित जैन बेहतर और स्थाई परिणाम के लिए इन तीनों दवाओं के कम्प्लीट कॉम्बिनेशन सेट को एक साथ लेने की सलाह देते हैं:
  1. G-8 - पाईल्स ड्रॉप्स (मस्सों को सुखाने के लिए)
  2. G-9 - एनल फिशर ड्रॉप्स (तेज जलन और दर्द को शांत करने के लिए)
  3. G-71 - लैक्सेटिव ड्रॉप्स (कब्ज दूर कर पेट पूरी तरह साफ करने के लिए) 

 
विशेष ऑफर: हमारे Dukaan स्टोर पर शुद्ध, प्रामाणिक और 100% ओरिजिनल GMP Certified Ganga Homeo Pharma की दवाएं सीधे कंपनी से मंगाकर उपलब्ध कराई जाती हैं। सुरक्षित और फास्ट पैन-इंडिया (Pan-India) डिलीवरी के साथ अपनी आवश्यक दवा आज ही घर बैठे ऑर्डर करें।

 
राहत पाने के लिए जरूरी लाइफस्टाइल टिप्स
होम्योपैथिक दवाओं के बेहतरीन और तेज असर के लिए आपको अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव करने बेहद जरूरी हैं:
  • फाइबर युक्त भोजन लें: अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, दलिया, ओट्स और ताजे फलों को शामिल करें।
  • भरपूर पानी पीएं: दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीएं ताकि आंतों में सूखापन न आए।
  • तीखा और जंक फूड बंद करें: अत्यधिक मिर्च-मसालेदार भोजन, मैदा, समोसे-कचौड़ी और फास्ट फूड से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि ये पेट में एसिडिटी और कब्ज बढ़ाते हैं।
अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई संशय है, तो आप हमारे स्टोर पर दिए गए WhatsApp बटन के माध्यम से डॉ. अजित जैन से सीधे ऑनलाइन परामर्श भी ले सकते हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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